स्कूली बच्चों की सुरक्षा पर सख्ती, सड़क सुरक्षा समिति के निर्देश पर स्कूलों में औचक निरीक्षण, 44 छात्र दोपहिया वाहन से पकड़े गए

Report By : आसिफ अंसारी
शहर में स्कूली बच्चों की सुरक्षा (Student Safety) को लेकर सड़क सुरक्षा समिति (Road Safety Committee) के निर्देशों के क्रम में एक अहम अभियान चलाया गया। इस अभियान के तहत यातायात पुलिस (Traffic Police), परिवहन विभाग (Transport Department) और जिला विद्यालय निरीक्षक (District School Inspector) की संयुक्त टीम द्वारा शहर के विभिन्न स्कूलों (Schools) में औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) किया गया। निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि स्कूली बच्चे यातायात नियमों (Traffic Rules) और मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) के प्रावधानों का पालन करते हुए सुरक्षित तरीके से स्कूल आ-जा रहे हैं।
संयुक्त टीम द्वारा किए गए इस निरीक्षण के दौरान यह तथ्य सामने आया कि लगभग 44 स्कूली बच्चे दोपहिया वाहन (Two Wheeler) से स्कूल आते पाए गए, जो कि मोटर वाहन अधिनियम के नियमों के अनुरूप नहीं था। इनमें से अधिकांश बच्चे न तो वैध ड्राइविंग लाइसेंस (Driving License) रखते थे और न ही सुरक्षा उपकरण जैसे हेलमेट (Helmet) का उपयोग कर रहे थे। यह स्थिति बच्चों की जान के लिए गंभीर खतरा (Serious Risk) मानी गई, जिसे देखते हुए अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई की।
निरीक्षण के दौरान सभी संबंधित बच्चों के अभिभावकों (Parents) को नोटिस (Notice) जारी किए गए और उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए गए कि भविष्य में अपने बच्चों को स्वयं वाहन चलाकर स्कूल न भेजें। अभिभावकों को यह भी समझाया गया कि नाबालिग बच्चों द्वारा वाहन चलाना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि यह बच्चों और अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं (Road Users) के लिए भी खतरनाक साबित हो सकता है। टीम द्वारा अभिभावकों को सख्त चेतावनी (Warning) दी गई कि यदि निकट भविष्य में इस प्रकार की पुनरावृत्ति पाई गई, तो उनके खिलाफ प्रवर्तन (Enforcement Action) की कठोर कार्रवाई की जाएगी।

इसके बावजूद निरीक्षण के उपरांत भी कुछ बच्चे अपने निजी वाहनों से स्कूल जाते हुए पाए गए, जिसके बाद प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए उनके विरुद्ध मोटर वाहन अधिनियम के तहत प्रवर्तन की कार्रवाई की। अधिकारियों द्वारा बताया गया कि जनवरी माह से अब तक कुल 33 स्कूली बच्चों के वाहनों का चालान (Challan) काटा जा चुका है। यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि बच्चों और अभिभावकों में यातायात नियमों के प्रति जागरूकता (Awareness) अभी भी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाई है।
यातायात पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह अभियान किसी को दंडित करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चलाया जा रहा है। स्कूल जाने वाले बच्चों की उम्र कम होती है और इस उम्र में वाहन चलाना उनकी शारीरिक व मानसिक क्षमता (Physical and Mental Ability) के अनुरूप नहीं होता। ऐसे में किसी भी प्रकार की दुर्घटना (Accident) उनके भविष्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है। इसी कारण सड़क सुरक्षा समिति ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि स्कूली बच्चों को सुरक्षित परिवहन साधनों (Safe Transport Options) के माध्यम से ही स्कूल भेजा जाए।
जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग (Education Department) ने भी स्कूल प्रबंधन से अपील की है कि वे अभिभावकों के साथ बैठक कर बच्चों की सड़क सुरक्षा को लेकर चर्चा करें और स्कूल स्तर पर जागरूकता अभियान (Awareness Program) चलाएं। इसके साथ ही स्कूलों के बाहर यातायात व्यवस्था (Traffic Management) को और अधिक सुदृढ़ करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि स्कूल समय के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कार्रवाई आगे भी अनवरत (Continuous) रूप से जारी रहेगी। यदि भविष्य में कोई भी स्कूली बच्चा दोपहिया या चारपहिया वाहन चलाते हुए पाया गया, तो उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का मानना है कि नियमों के कड़ाई से पालन और जागरूकता के माध्यम से ही सड़क दुर्घटनाओं को कम किया जा सकता है और बच्चों को सुरक्षित भविष्य (Safe Future) प्रदान किया जा सकता है।





