गाजीपुर में सैय्यद बाबा के सालाना उर्स का आयोजन, अकीदतमंदों ने चढ़ाई चादर, मांगी दुआएं

Report By: आसिफ अंसारी

गाजीपुर: उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जनपद में सैय्यद बाबा का सालाना उर्स बीती रात बड़ी अकीदत और उत्साह के साथ मनाया गया। इस पवित्र अवसर पर नगर सहित आसपास के क्षेत्रों और दूर-दराज से आए सैकड़ों अकीदतमंदों ने सैय्यद बाबा की मजार पर माथा टेककर दुआएं मांगीं और अपनी मन्नतें पूरी होने की कामना की। उर्स के मौके पर आयोजित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए, जिसमें मुस्लिम समुदाय के साथ-साथ हिंदू वर्ग के लोग भी भारी तादाद में मौजूद रहे, जो इस आयोजन की सांप्रदायिक सौहार्द की भावना को दर्शाता है।

कुरानख्वानी और चादरपोशी के साथ शुरू हुआ उर्स
उर्स का आयोजन सुबह कुरानख्वानी के साथ शुरू हुआ, जिसमें अकीदतमंदों ने पवित्र कुरान की तिलावत की और सैय्यद बाबा की रूहानी शख्सियत को याद किया। नमाज-ए-मगरिब के बाद रौजा स्थित खोवा मंडी से मरहूम मुश्ताक अहमद उर्फ लड्डू भाई के घर से गागर और चादर उठाई गई। यह जुलूस रजदेपुर, कपूरपुर, लालदरवाजा होते हुए कोतवाली के सामने देवा मेडिकल स्टोर के पास बाबा कटरा वाली मजार पर पहुंचा। वहां जायरीनों ने गागर के पानी से मजार को गुस्ल (स्नान) करवाया और चादरपोशी की रस्म अदा की। इस दौरान सिन्नी और तबर्रुक चढ़ाकर अकीदतमंदों ने अपनी मन्नतें मांगीं।

मिलाद और लंगर का आयोजन
ईशा की नमाज के बाद मजार पर मिलाद का आयोजन किया गया, जिसमें सैय्यद बाबा के जीवन और उनकी शिक्षाओं को याद किया गया। मिलाद के बाद अकीदतमंदों के बीच लंगर वितरित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। लंगर के आयोजन ने सामुदायिक एकता और भाईचारे का संदेश दिया। इस अवसर पर सभी धर्मों के लोग एक साथ बैठकर लंगर का प्रसाद ग्रहण करते नजर आए, जो इस आयोजन की खासियत रही।

सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक
सैय्यद बाबा के उर्स ने एक बार फिर गाजीपुर की गंगा-जमुनी तहजीब को उजागर किया। इस आयोजन में मुस्लिम समुदाय के साथ-साथ हिंदू वर्ग के लोगों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। मजार पर माथा टेकने और दुआएं मांगने वालों में हर वर्ग के लोग शामिल थे, जो इस बात का प्रतीक है कि सैय्यद बाबा का आध्यात्मिक प्रभाव सभी समुदायों पर एकसमान है। इस अवसर पर आपसी भाईचारे और सौहार्द का माहौल देखने को मिला, जिसने गाजीपुर की सामाजिक एकता को और मजबूत किया।

प्रमुख लोगों की मौजूदगी
उर्स के आयोजन में कई प्रमुख लोग शामिल रहे, जिनमें जनाब इम्तियाज अहमद उर्फ पप्पू भाई, मुमताज अहमद, रियाज अहमद, शेखू भाई, अजहर, नन्हे भाई, शिबू भाई, अरशद, आरिफ वारसी सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद थे। इन सभी ने आयोजन को सुचारू रूप से संपन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आयोजन के दौरान स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए, ताकि जायरीनों को किसी तरह की असुविधा न हो।
गाजीपुर, जिसे लहुरी काशी के नाम से भी जाना जाता है, अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध है। सैय्यद बाबा का उर्स इस जनपद की धार्मिक और सामाजिक एकता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह उर्स न केवल आध्यात्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह विभिन्न समुदायों को एक मंच पर लाकर सामाजिक सद्भाव को भी बढ़ावा देता है।
सैय्यद बाबा के उर्स का यह आयोजन हर साल की तरह इस बार भी शांति और भाईचारे के साथ संपन्न हुआ। अकीदतमंदों ने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में भी यह परंपरा इसी तरह कायम रहेगी और गाजीपुर की सांप्रदायिक एकता का प्रतीक बनी रहेगी। इस अवसर पर कई लोगों ने सैय्यद बाबा की शिक्षाओं को अपनाने और समाज में प्रेम व शांति का संदेश फैलाने का संकल्प लिया।

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