वस्त्र उद्योग ने बांग्लादेश को यार्न निर्यात के समाधान तलाशने शुरू किए

नई दिल्ली
भारतीय वस्त्र उद्योग ने बांग्लादेश को यार्न (सूत) के निर्यात से जुड़ी चुनौतियों के समाधान की दिशा में प्रयास तेज़ कर दिए हैं। हाल ही में उद्योग के प्रमुख संगठनों, निर्यातकों और सरकारी प्रतिनिधियों की एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें दोनों देशों के बीच यार्न व्यापार को सुचारु बनाने पर चर्चा की गई।

भारत, जो दुनिया के सबसे बड़े कपास यार्न उत्पादकों में से एक है, पिछले कई वर्षों से बांग्लादेश को बड़ी मात्रा में यार्न निर्यात करता आ रहा है। बांग्लादेश का गारमेंट उद्योग मुख्य रूप से भारत से आने वाले सूत पर निर्भर है। हालांकि, हाल के समय में निर्यात में बाधाएं जैसे सीमावर्ती अड़चनें, लॉजिस्टिक लागत में वृद्धि, और टैरिफ संबंधित समस्याएं सामने आई हैं। इन कारणों से निर्यातकों को भारी नुकसान झेलना पड़ा है।

उद्योग की प्रतिक्रिया
भारतीय टेक्सटाइल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (TEPC) के अनुसार, यार्न निर्यात को फिर से गति देने के लिए लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को अपग्रेड करने, सीमा शुल्क प्रक्रिया को सरल बनाने और द्विपक्षीय संवाद को मजबूत करने की आवश्यकता है। कुछ प्रस्तावों में विशेष निर्यात कॉरिडोर, डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन प्रक्रिया और ड्यूटी छूट की मांग भी शामिल है।

उद्योगपतियों की चिंता
एक प्रमुख यार्न निर्यातक ने कहा,
बांग्लादेश के साथ व्यापारिक संबंध हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। लेकिन मौजूदा अड़चनों के चलते हमारी प्रतिस्पर्धा पर असर पड़ा है। हमें सरकार से स्थायी समाधान की उम्मीद है।”

बांग्लादेश की स्थिति
बांग्लादेश सरकार ने भी हाल ही में संकेत दिए हैं कि वह भारत के साथ यार्न व्यापार को आसान बनाने के लिए नीतिगत सहयोग देने को तैयार है। उनका कहना है कि स्थायी और भरोसेमंद सप्लाई चैन दोनों देशों के हित में है।

भविष्य की योजना
सरकार और उद्योग जगत मिलकर एक संयुक्त कार्यबल बनाने पर विचार कर रहे हैं, जो यार्न निर्यात के लिए बाधाओं की पहचान कर त्वरित समाधान प्रस्तुत करेगा। इसके अलावा, दोनों देशों के बीच एक स्थायी व्यापार समझौते की भी संभावना जताई जा रही है, जिससे कपड़ा क्षेत्र को नया आयाम मिल सकता है।


भारतीय वस्त्र उद्योग की यह पहल न सिर्फ निर्यातकों को राहत दे सकती है, बल्कि भारत-बांग्लादेश व्यापार संबंधों को भी नई दिशा दे सकती है। यदि ये समाधान जल्द लागू होते हैं, तो यार्न उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भी मजबूती मिलेगी।


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