गाजीपुर में दिल दहला देने वाली घटना: पिता ने 4 साल की बेटी से किया दुष्कर्म, फरार

Report By : आसिफ़ अंसारी

गाजीपुर : जिले के भांवरकोल थाना क्षेत्र के एक गांव में रिश्तों को शर्मसार करने वाली एक भयावह घटना सामने आई है। इस घटना ने पूरे समुदाय को झकझोर कर रख दिया है, जिसमें एक पिता ने अपनी 4 साल की मासूम बेटी के साथ दुष्कर्म किया। इस जघन्य अपराध को अंजाम देने के बाद आरोपी पिता फरार हो गया, जिसके बाद पुलिस ने उसकी तलाश शुरू कर दी है। पीड़िता की मां ने तुरंत इस घटना की शिकायत पुलिस से की, जिसके आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है। मासूम बच्ची का इलाज जिले के एक महिला अस्पताल में चल रहा है, जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।

मानवता को शर्मसार करने वाला अपराध
यह घटना भांवरकोल थाना क्षेत्र के एक गांव में हुई, जिसने गाजीपुर के निवासियों को स्तब्ध कर दिया है। जानकारी के अनुसार, आरोपी पिता, जिसकी पहचान पीड़िता की गोपनीयता के लिए उजागर नहीं की गई है, ने उस समय इस अपराध को अंजाम दिया जब बच्ची उसके साथ अकेली थी। 4 साल की मासूम बच्ची, जो इस भयावह कृत्य से अनजान थी, को अपने ही पिता के हाथों अकल्पनीय यातना झेलनी पड़ी, जो उसका रक्षक होना चाहिए था। मां, जो घटना के समय घर पर मौजूद नहीं थी, लौटने पर अपनी बेटी को दर्द से कराहते और शारीरिक रूप से घायल अवस्था में पाया।

स्थिति की गंभीरता को समझते हुए मां ने तुरंत अपनी बेटी को नजदीकी चिकित्सा केंद्र ले गई। प्रारंभिक जांच के बाद डॉक्टरों ने दुष्कर्म की पुष्टि की, और बच्ची को विशेष इलाज के लिए गाजीपुर के एक महिला अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया। बच्ची की हालत गंभीर बताई जा रही है, और वह शारीरिक चोटों के साथ-साथ गहरे मनोवैज्ञानिक आघात से जूझ रही है। अस्पताल के चिकित्सा कर्मचारी उसकी स्थिति को स्थिर करने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं, लेकिन शारीरिक और भावनात्मक रिकवरी का रास्ता लंबा और कठिन होने की उम्मीद है।

पुलिस की कार्रवाई और जांच शुरू
पीड़िता की मां ने इस विनाशकारी त्रासदी का सामना करते हुए हिम्मत दिखाई और अपने पति के खिलाफ भांवरकोल थाना में शिकायत दर्ज की। उनकी शिकायत के आधार पर, पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और बाल यौन शोषण से संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। हालांकि, आरोपी पिता घटना के तुरंत बाद गांव से फरार हो गया, और उसका अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है।

भांवरकोल थाना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की कि आरोपी को पकड़ने के लिए एक विशेष टीम गठित की गई है। अधिकारी ने कहा, “हमने मां की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है और गहन जांच कर रहे हैं। कई टीमें जमीन पर काम कर रही हैं, और हम आरोपी को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने के लिए सभी संभावित सुरागों का पीछा कर रहे हैं।” पुलिस ने जनता से भी अपील की है कि यदि किसी के पास आरोपी के ठिकाने के बारे में कोई जानकारी है, तो वह साझा करें, साथ ही यह आश्वासन दिया कि सूचना देने वालों की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।

समुदाय में आक्रोश और न्याय की मांग
इस घटना ने गांव और पूरे गाजीपुर जिले के निवासियों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। स्थानीय लोग भांवरकोल थाना के पास इकट्ठा हुए और मासूम पीड़िता के लिए त्वरित न्याय और आरोपी के लिए कठोर से कठोर सजा की मांग की। एक पड़ोसी ने, जो अपनी पहचान उजागर नहीं करना चाहता था, कहा, “यह एक अक्षम्य अपराध है। एक पिता अपनी ही बेटी के साथ ऐसा कैसे कर सकता है? उसे कोई दया नहीं मिलनी चाहिए।” एक अन्य निवासी ने कहा, “हम चाहते हैं कि पुलिस उसे जल्द से जल्द पकड़े। ऐसा राक्षस आजाद नहीं घूमना चाहिए।”

इस मामले ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चर्चा को फिर से तेज कर दिया है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जहां बाल संरक्षण कानूनों और सहायता प्रणालियों के बारे में जागरूकता सीमित हो सकती है। क्षेत्र के कार्यकर्ताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने समुदायों को बाल अधिकारों और ऐसी घटनाओं की बिना डर के रिपोर्टिंग के महत्व के बारे में शिक्षित करने के लिए बढ़े हुए प्रयासों की मांग की है। एक स्थानीय बाल अधिकार कार्यकर्ता ने कहा, “यह घटना बच्चों की असुरक्षा की एक भयावह याद दिलाती है, यहां तक कि उनके अपने घरों में भी। हमें मजबूत सामुदायिक सहायता प्रणालियों और तेज कानूनी कार्रवाई की जरूरत है ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके।”

क्षेत्र में चिंता का एक पैटर्न यह घटना उत्तर प्रदेश में अपनी तरह की पहली घटना नहीं है, जहां बच्चों के खिलाफ अपराध एक बढ़ती चिंता का विषय बन गए हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में हाल के वर्षों में पॉक्सो अधिनियम के तहत कई मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से कई में अपराधी पीड़ितों के परिचित, जिसमें परिवार के सदस्य भी शामिल हैं। गाजीपुर की यह घटना बाल यौन शोषण की चिंताजनक प्रवृत्ति को और बढ़ाती है, जो कमजोर बच्चों के लिए सख्त कानून प्रवर्तन और बेहतर सुरक्षा तंत्र की तत्काल आवश्यकता को उजागर करती है।

2019 में विशाखापत्तनम में दर्ज एक समान मामले में, एक पिता पर अपनी 14 साल की बेटी के साथ दो साल तक दुष्कर्म करने का आरोप लगा था, जब मां ने परिवार छोड़ दिया था। उस मामले में भी आरोपी फरार था, जब तक कि मां ने उसे अपराध करते हुए पकड़ नहीं लिया और पुलिस को सूचना दी [Ref web ID: 7]। ऐसे मामले परिवार के भीतर विश्वासघात और युवा पीड़ितों पर पड़ने वाले विनाशकारी प्रभाव को रेखांकित करते हैं, जो अक्सर उन्हें जीवन भर के लिए निशान दे जाते हैं।
पीड़िता और उसके परिवार के लिए आगे का रास्ता

जब मासूम पीड़िता महिला अस्पताल में अपनी जिंदगी के लिए संघर्ष कर रही है, उसकी मां उसके साथ बनी हुई है, अपनी बेटी को इस तरह पीड़ित देखकर अकल्पनीय दर्द से गुजर रही है। यह परिवार, जो पहले ही इस घटना से टूट चुका है, अब न्याय की मांग करने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करने का कठिन काम कर रहा है कि बच्ची को वह देखभाल और समर्थन मिले जिसकी उसे जरूरत है। बाल कल्याण संगठनों ने परिवार को परामर्श और सहायता प्रदान करने के लिए कदम बढ़ाया है, जिसमें युवा बचे हुए व्यक्ति के लिए दीर्घकालिक पुनर्वास की महत्ता पर जोर दिया गया है।

गाजीपुर की यह घटना एक कड़वी याद दिलाती है कि पारिवारिक बंधनों की पवित्रता के भीतर भी अंधेरा छुपा हो सकता है। जैसे-जैसे पुलिस आरोपी की तलाश जारी रखे हुए है, समुदाय सांस रोककर न्याय की प्रतीक्षा कर रहा है, इस उम्मीद के साथ कि मासूम बच्ची इस भयावह परीक्षा के बाद एक दिन शांति और उपचार पा सके।

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