भोजपुर जिले के ये पुल बना जानलेवा, नजर हटी और दुर्घटना घटी जैसी स्थिति

संवाददाता: तारकेश्वर प्रसाद

आरा: सरकार की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों को शहरों से जोड़ने के लिए सड़कों और पुलों का निर्माण कराया जाता है, ताकि आवागमन सुगम हो और विकास की रफ्तार तेज हो। लेकिन हकीकत कई बार इससे बिल्कुल उलट देखने को मिलती है। सरकारी तंत्र और ठेकेदारों की कथित मिलीभगत के चलते विकास योजनाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती हैं और आम जनता को उसका खामियाजा जान जोखिम में डालकर भुगतना पड़ता है। ऐसा ही एक गंभीर और चिंताजनक मामला भोजपुर जिले के गड़हनी प्रखंड अंतर्गत बलिगांव से सामने आया है, जहां एक निर्माणाधीन पुल अब लोगों के लिए सुविधा नहीं बल्कि खतरे की वजह बन चुका है।

बलिगांव में बना यह पुल सैकड़ों गांवों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग बताया जा रहा है, लेकिन इसकी मौजूदा हालत देखकर यही कहा जा सकता है कि “नजर हटी और दुर्घटना घटी” जैसी स्थिति यहां हर वक्त बनी रहती है। यह निर्माणाधीन पुल बेहद जर्जर अवस्था में है और किसी भी बड़े हादसे को खुला न्योता दे रहा है।

बरसात में और भी खतरनाक हो जाता है पुल
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, यह पुल मिट्टी से बना हुआ है और बारिश के दिनों में इसकी स्थिति और भी बदतर हो जाती है। बरसात में पुल पर कीचड़ फैल जाता है, जिससे दोपहिया वाहन, चारपहिया वाहन ही नहीं बल्कि पैदल चलना भी जानलेवा साबित हो सकता है। बड़े वाहन फिसलने के डर से इस रास्ते से गुजरने से कतराते हैं, वहीं मजबूरी में गुजरने वाले लोग हर पल हादसे की आशंका से डरे रहते हैं।

पांच साल पहले धराशायी हो चुका है पुल
ग्रामीणों ने बताया कि यह पुल करीब पांच साल पहले ही धराशायी हो गया था। इसके बाद से अब तक न तो इसका समुचित पुनर्निर्माण किया गया और न ही सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम किए गए। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार आवेदन देकर, मौखिक और लिखित रूप से स्थानीय पदाधिकारियों को इस गंभीर समस्या से अवगत कराया, लेकिन आज तक उनकी शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

ग्रामीणों में भारी आक्रोश
पुल की बदहाल स्थिति को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। लोगों का कहना है कि यह पुल बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और रोजमर्रा में आवागमन करने वाले मजदूरों के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है। स्कूल जाने वाले बच्चों और बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचाने में भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

मुखिया ने जताई बड़ी आशंका
इस मामले पर पश्चिमी आयर पंचायत के मुखिया उमेश कुमार सिंह ने भी गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने बताया कि वे स्वयं इसी रास्ते से गुजर रहे थे, तभी पुल की खतरनाक स्थिति उनकी नजर में आई। मुखिया का कहना है कि यदि जल्द से जल्द इस पुल पर प्रशासन द्वारा संज्ञान नहीं लिया गया, तो यह पुल सैकड़ों लोगों को मौत के आगोश में ले सकता है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि पुल के निर्माण की गुणवत्ता की जांच कराई जाए और जल्द से जल्द इसका सुरक्षित निर्माण कराया जाए।

बड़ा सवाल – कब जागेगा प्रशासन?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर प्रशासन इस जानलेवा पुल को लेकर कब जागेगा? क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही जिम्मेदारों की नींद खुलेगी? ग्रामीणों की मांग है कि पुल के निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच हो, दोषी ठेकेदारों और अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और आम जनता की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए।

फिलहाल बलिगांव का यह पुल विकास की नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही और भ्रष्टाचार की कहानी बयां कर रहा है, जहां हर गुजरता दिन किसी बड़े हादसे की आशंका को और गहरा कर रहा है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हमें फॉलो करें और हमसे जुड़े रहें।
(Follow us on social media platforms and stay connected with us.)

Youtube – https://www.youtube.com/@KarmakshetraTV
Facebook – https://www.facebook.com/karmakshetratvofficial
Instagram
https://www.instagram.com/karmakshetratvofficial/
Twitter – https://x.com/KarmakshetraTV
Whatsapp – https://www.whatsapp.com/channel/0029Vaz88DkG3R3nqmdV1H41

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!