वैशाली: जलकुंभी से खुला स्वरोजगार का नया अवसर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी मांग


वैशाली, बिहार: जलकुंभी, जिसे अब तक अनुपयोगी समझा जाता था, अब वैशाली जिले के हस्तशिल्प कलाकारों के लिए स्वरोजगार का महत्वपूर्ण साधन बन गई है। जिला प्रशासन की पहल और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती मांग के कारण जलकुंभी से बनी वस्तुएं न केवल स्थानीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी पहचान बना रही हैं।

जिला प्रशासन और हस्तशिल्पकला का अनूठा प्रयास
वैशाली के जिला पदाधिकारी यशपाल मीणा के निर्देशन में भगवानपुर प्रखंड के बीडीओ आनंद मोहन ने भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के सहयोग से इस परियोजना की शुरुआत की। भगवानपुर प्रखंड के असतपुर सतपुरा ग्राम में 5 अगस्त को गुरु-शिष्य प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ, जिसे जिलाधिकारी ने दीप प्रज्वलित कर शुरू किया।

इस 30-दिवसीय प्रशिक्षण में 30 महिलाओं को जलकुंभी को जलाशय से निकालने, काटने, सुखाने और उसे बहुउपयोगी वस्तुओं में बदलने की कला सिखाई गई। सूखे हुए जलकुंभी के डंठल से रो मैटेरियल तैयार कर उसे बैग, टोपी, मैट, और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुओं में परिवर्तित किया गया।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती मांग
सूत्रों के अनुसार, स्थानीय बाजार में इन वस्तुओं की कीमत कम है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनकी भारी मांग है। मांग इतनी अधिक है कि उत्पाद हमेशा आउट ऑफ स्टॉक रहते हैं।

प्रशिक्षण में विशेषज्ञता और वित्तीय सहायता
प्रशिक्षण के लिए वेस्ट बंगाल के ग्वालपाड़ा से इंदिरा ब्रह्मा को बुलाया गया। प्रतिभागियों की बायोमेट्रिक उपस्थिति सुनिश्चित की गई और उन्हें प्रशिक्षण के दौरान आने-जाने के लिए ₹300 प्रतिदिन की राशि सीधे उनके बैंक खाते में दी गई।

पेंशन और प्रोत्साहन योजनाएं
वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार के विकास आयुक्त कार्यालय के श्री मुकेश कुमार ने बताया कि इस योजना के तहत चयनित हस्तशिल्प कलाकारों को 60 वर्ष की उम्र के बाद ₹7000 प्रतिमाह पेंशन दी जाती है। साथ ही, उत्कृष्ट कार्य करने वाले कलाकारों को भारत सरकार द्वारा पुरस्कृत भी किया जाता है।

आत्मनिर्भरता की ओर कदम
यह योजना न केवल स्वरोजगार को बढ़ावा देती है, बल्कि कलाकारों को आत्मनिर्भर बनने का मौका भी प्रदान करती है। इसके तहत तैयार उत्पादों की मार्केटिंग का जिम्मा भी वस्त्र मंत्रालय द्वारा लिया जाता है।

जलाशयों में उगने वाली जलकुंभी अब एक महत्वपूर्ण संसाधन के रूप में उभर रही है, जिससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भी एक बड़ा कदम उठाया गया है।

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