मौसम आधारित कृषि परामर्श जारी, आगामी दो सप्ताह के लिए किसानों को विस्तृत दिशा-निर्देश

उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद ने आगामी दो सप्ताह के लिए मौसम आधारित कृषि परामर्श जारी किया है। रबी फसल प्रबंधन, रोग नियंत्रण, (FMD) टीकाकरण और मत्स्य पालन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए हैं। किसानों के लिए विशेष (Portal) भी शुरू किया गया है।

उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा आगामी दो सप्ताह के लिए मौसम आधारित कृषि परामर्श जारी किया गया है। परिषद के महानिदेशक डॉ. संजय सिंह की अध्यक्षता में आयोजित (Crop Weather Watch Group) की 23वीं बैठक में प्रदेश के किसानों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश तय किए गए।

इस अवसर पर किसानों की सुविधा के लिए राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र द्वारा विकसित एक विशेष (Portal) का उद्घाटन भी किया गया। यह पोर्टल कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध रहेगा, जहां किसान मौसम पूर्वानुमान और फसल संबंधी परामर्श आसानी से प्राप्त कर सकेंगे।

बैठक में जारी मौसम पूर्वानुमान के अनुसार प्रदेश के उत्तरी हिस्सों में आगामी सप्ताह के दौरान छिटपुट वर्षा की संभावना है। 17 फरवरी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने का अनुमान व्यक्त किया गया है। बुंदेलखंड और दक्षिण-पश्चिमी मैदानी क्षेत्रों में तापमान सामान्य से 2 से 4 डिग्री सेल्सियस अधिक रहने की संभावना है।

परिषद ने किसानों को सलाह दी है कि वे रबी फसलों में नमी बनाए रखने के लिए आवश्यकता अनुसार सिंचाई करें। जनवरी में बोई गई गेहूं की फसल में उचित नमी की स्थिति में यूरिया की (Top Dressing) करने की अनुशंसा की गई है, जिससे उत्पादन में वृद्धि सुनिश्चित हो सके।

विशेषज्ञों ने आलू की फसल के संदर्भ में सुझाव दिया कि खुदाई से लगभग 10 दिन पूर्व बेल काट दी जाए। इसके पश्चात मक्के की बुआई की जा सकती है। गन्ने की बसंतकालीन बुआई के लिए उन्नत किस्मों को अपनाने और अंत:फसल के रूप में गन्ना-उर्द या गन्ना-भिंडी की खेती करने की सलाह दी गई है, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय प्राप्त हो सके।

सब्जी फसलों में रोग नियंत्रण के लिए टमाटर और मिर्च में विषाणु जनित (Leaf Curl) रोग के प्रसार को रोकने हेतु फिप्रोनिल या इमिडाक्लोप्रिड के छिड़काव की अनुशंसा की गई है।

पशुपालन क्षेत्र में राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत पशुओं में (FMD) टीकाकरण अभियान संचालित किया जा रहा है। किसानों को अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय से संपर्क कर टीकाकरण का लाभ उठाने की सलाह दी गई है।

मत्स्य पालन के क्षेत्र में मत्स्य पालकों को मत्स्य बीज उत्पादन के लिए (Common Carp) ब्रीडिंग की तैयारी प्रारंभ करने का सुझाव दिया गया है।

बैठक में परिषद के वैज्ञानिकों और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया। परिषद का उद्देश्य है कि वैज्ञानिक जानकारी और मौसम पूर्वानुमान के आधार पर किसानों को समय रहते उचित मार्गदर्शन प्रदान किया जाए, ताकि फसल हानि को न्यूनतम किया जा सके और उत्पादन क्षमता में वृद्धि हो।

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